बढ़ती उम्र के साथ महिलाओं को कई तरह की शारीरिक समस्याएं घेर लेती हैं। इसकी वजह कहीं न कहीं उनका अपनी सेहत को लेकर लापरवाह रहना भी है। इस वजह से कई बीमारियां गंभीर स्थिति तक भी पहुंच जाती हैं। लेकिन किसी खास तरह के लक्षण दिखने पर या समस्या होने पर डॉक्टर की सलाह के बाद जरूरी मेडिकल टेस्ट करवाए जाएं तो महिलाएं कई तरह की बीमारियों से दूर रह सकती हैं...
पेल्विक अल्ट्रासाउंड
पीरियड्स का अनियमित होना, थकान या बच्चेदानी में सूजन जैसी परेशानियां समय-समय पर महिलाओं को फेस करनी पड़ती हैं। इसलिए जरूरी है कि इन समस्याओं के लिए डॉक्टर की सलाह पर पेल्विक अल्ट्रासाउंड टेस्ट करवाया जाए। जिससे ओवरी कैंसर के खतरे से बचा जा सकता है।
मैमोग्राम चेकअप 
इस टेस्ट को समय रहते कराने से ब्रेस्ट कैंसर से बचाव हो सकता है। 40 की उम्र के बाद महिलाओं को यह टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। अगर परिवार में कोई महिला इस बीमारी का शिकार रही है तो हर 6 महीने बाद चेकअप जरूर करवाएं।
सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग
30 से 65 वर्ष की महिलाओं को लगभग हर पांच साल बाद पैप स्मियर टेस्ट (सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग) जरूर कराना चाहिए। इस टेस्ट को कराने से आपको गर्भाशय में होने वाली सूजन और संक्रमण के बारे में जानकारी मिलती है, जो सर्वाइकल कैंसर का लक्षण हो सकता है।
थायरॉइड टेस्ट  
40 की उम्र के बाद अचानक वजन बढ़ने, कोलेस्ट्रॉल बढ़ने, उदासी, तनाव जैसे लक्षण दिखें तो महिलाओं को थायरॉइड की जांच करानी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि साल में एक बार थायरॉइड यानी टी.एस.एच. टेस्ट करवाया जाए। 
टेस्ट के लाभ 
- समय रहते हेल्थ चेकअप कराने से महिलाएं कैंसर, डायबिटीज, हार्ट प्रॉब्लम, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों से बच सकती हैं। 
-दिल के दौरे और स्ट्रोक जैसी प्रॉब्लम से बचने के लिए समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक करवाती रहें। 
- परिवार में मोटापे या डायबिटीज की समस्या है तो समय-समय पर शुगर टेस्ट करवाती रहें। 
स्क्रीनिंग टेस्ट 
कई बार महिलाएं बहुत तनाव में रहने लगती हैं। लगातार तनाव लेने की वजह से कई बार वे डिप्रेशन का शिकार हो जाती हैं। डिप्रेशन को कम करने के लिए महिलाओं को साइकोलॉजिस्ट के पास जाकर स्क्रीनिंग टेस्ट करवाना चाहिए।